अपने खंडान की नमकीन चाय की कहानी

नस्ल परिचय

अपने खंडान की नमकीन चाय की कहानी

भारतीय सब्जी और मसालों से भरी नाश्ते के बाद कुछ चाय पीना हर भारतीय का काम है। स्कूल, कॉलेज, काम, ट्रेन या कहीं और भी, चाय एक महत्वपूर्ण लिबास हो गया है। यह सिर्फ एक रसायन नहीं है बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सम्बन्ध को भी दर्शाती है, धीरे-धीरे मस्ती भरी बुन्दें एकता और जागरूकता को दर्शाती है, जागरूकता और खुशी को हमेशा याद रखती है। लेकिन क्या आप अपनी आवाज़ के उच्चारण, वाक्य आदि के अलावा अपने चाय के नाम से बाहर भी कुछ पता कर सकते हैं? चाय आपके घर की नमकीन चाय हो सकती है, या आपके खंडान की पूर्वजों की पसंददा चाय भी हो सकती है।

हमारे देश में, बिना चाय के दिन बहुत अधूरे होते हैं। जिंदगी में, विभिन्न समय पर, लोगों ने विभिन्न प्रकार के चाय परोसे हैं। यह गुलाबी चाय, कढ़ाई चाय, मासला चाय, अंग्रेज़ी चाय, नींबू पुदीना चाय, चाय मसाला और कई और शामिल हैं। हमारे देश में चाय की बहुत सी परंपराएँ हैं, जो कि दुनिया की अन्य चाय परंपराओं से अलग हैं। अपने खंडान की नमकीन चाय की सबसे आम परंपरा में, चाय के लिए सबसे पुराने तरीकों में से एक तरीका है, जो खुरचाने के साथ बनाया जाता है।

खुरचाने का लगभग सभी हिंदू सामान्य परिवारों में मशहूर है और यह कभी मना नहीं किया जाता है। यही कुछ खंडानों में नमकीन चाय बनाने के लिए भी उपयोग किया जाता है। इस परंपरा का आगे-पीछे होते हुए, खुरचाने को जल्दी से जल्दी तैयार करने के लिए सभी घर के लिए कुछ ख़ास उत्पाद उपलब्ध होते थे।

नमकीन चाय बनाने के लिए, खुरचाने को बनाना शुरू करने से पहले, सिंधी सैन्धव नमक को एक हल्के से तले गए प्लेट में फैलाया जाता है। इसके बाद, एक सूखी तले हुई जुलिस (जौ के बीजों का आटा) की एक टोंग नमक से भरा जाता है और खुरचाने से पहले इस टोंग से विभिन्न पकोड़े तैयार किए जाते हैं। खुरचाने के दौरान, खुरचाने के लिए विभिन्न पकवानों को तला जाता है और जो पकवान एक ही जुलीस से बनाए जाते हैं, उन्हें चाय के सुबह के लिए संग्रहित किया जाता है। सभी खुरचाने के गुणवत्ता को संभालने के लिए, सभी खुरचाने का हमेशा से अंतिम खुदाई टाइल्स पर होता है।

खुरचाने के साथ सामग्री का मूल्यांकन करना आम तौर पर अलग-अलग फैमिली में भिन्न होता है। इसके अलावा, चाय बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पत्तियों, मसालों, और चाय के अन्य उपकरणों के संदर्भ में भी विभिन्न पारंपरिक प्रकार होते हैं।

कुछ खंडानों में, लाल सौबत की चाय, एक अन्य परंपरागत चाय है। इस परंपरा का असली मूल राज्य पंजाब में होता है। इस चाय में, लाल अमृतसरी मसाला एवं नमक का उपयोग किया जाता है जो कि राजा-महाराजों द्वारा खूब खुिश होकर ही बनाई गई थी। कुछ खंडानों में, चाय बनाने के लिए घर के मेजबानों द्वारा उठाए गए हार्मोनीक नोट को लेकर दौड़ की जाती है।

चाय खाने का अभ्यास भारत में बहुत ही पुराना है। चाय के खर्च का मुख्य भाग भारत में सैलानियों व प्रयागकर्ताओं के होते हैं। इसके अलावा इस प्रसिद्ध मसाले देने वाली चाय को निरंतर अपडेट और संदर्भ पर अधिक जानने के लिए, अनुवादित नामों का अनुसरण करें। इस प्रकार, चाय के नामों के साथ-साथ, आप अपने खंडान के पुख्ता विरासत के बारे में जानने के बारे में अधिक जान सकते हैं।

कुछ खंडानों में, चाय की अन्य परंपराओं के बारे में एक छोटी उल्लेख स्थान होता है। इसबात से लगता है कि चाय बनाने की प्रक्रिया उपलब्ध नहीं होती होगी, जो उन्होंने अपने पुर्वजों से उन्हें मिली होगी। एक ऐसी बात हो सकती है कि, यह पुरानी परंपरा सभी के फ़र्शों पर मौजूद नहीं होगी, लेकिन सभी लोग जानते ही होंगे कि वे इस विरासत का जितना हो सकता है ख़र्च करना चाहते हैं।

अपनी असम के खंडान की नमकीन चाय को गर्म चाय के बराबर दावत करना हमें हमेशा याद रहेगा। इन छोटी-छोटी परंपराओं और उनकी मुस्तेशक फुट महसूस होते हैं जो समृद्ध विरासत वाली फ़ेमिली पेश करती है। चाय एक सरल वस्तु होती है जो हमारे खंडानों की मूलभूत, महत्वपूर्ण और सबसे प्रसिद्ध पुरानी परंपराओं में से एक है। और आपका खंडान भी इस परंपरा से कुछ न कुछ पास होगा। अब जब आप अपने घर में नमकीन चाय के साथ डीब्बे खोलोगे, तो बैठ जाओ और सोचो कि क्या आप अपने खंडान के चाय के इतिहास को सँभाल कर रख इस कदम को बढ़ाते हुए अपने खंडान की विरासत को आगे बढ़ाना चाहते हो? यदि नहीं तो, नमकीन चाय का आनंद लेने में संकोच न करें और कम से न कम दो चाय की प्यालियों का आनंद लें।

अपने खंडान की विरासत के उपरांत, नमकीन चाय हमारे खंडान को आकर्षित करने की क्षमता है। चाय, जो कि भारत की वर्षगांठ है, हमारे खंडानों की प्रतिष्ठा और विचारों को हमेशा से दर्शाती है। यह