अपने नाम के पुराने रूपों को खोजें

नस्ल परिचय
हमारे नाम हमारी पहचान होती हैं। हम इन्हें नहीं बदल सकते हैं। कुछ समय पहले हमारे पुरखों ने हमारे धर्म, जाति या कुल के आधार पर अपने बच्चों के नाम रखे थे। लेकिन समय के साथ नाम बदलते रहे, नए नाम आते रहे। इस तरह हमारे पुरखों से जुड़े नाम खो जाते हैं। इसलिए आज हम अपने नाम के पुराने रूपों को खोजने की जरूरत है।

अपने नाम की खोज

आज के दौर में नाम का एक अहम अंग हो गया है। उससे हमारी पहचान संबंधित होती है। हम लोग अक्सर अपने नाम को सोशल मीडिया अकाउंट जैसे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम में भी दर्ज करते हैं। इसलिए अपने नाम को चुनते समय हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। जब भी हम अपने नाम की खोज करते हैं, तो हमें बहुत सारे विकल्प मिलते हैं। हम अपने नए नाम चुन सकते हैं या फिर अपने पुराने नाम को ही रख सकते हैं। लेकिन अधिकतर लोग अपने नाम को नए नाम से बदल देते हैं। इससे वे अपनी पहचान को बदल देते हैं।

परम्परागत नामों का महत्व

परम्परागत नामों का महत्व इतना ही नहीं बल्कि यह अपना असली नाम होता है। इसके अलावा, परम्परागत नामों के बहुत सारे महत्व होते हैं। जैसे कि उस नाम से व्यक्ति के पुरखों का सम्बन्ध होता है। वह नाम उसी परिवार में पैदा होने वाले सदस्यों में केवल एक बार दिया जाता है। उसके साथ उस नाम के धारक का एक नाता बन जाता है।

नाम के परिवर्तन का इतिहास

भारतीय इतिहास में नामों का परिवर्तन हमेशा से हुआ है। भारतीय समाज में नाम का अहम अंग होता है। इसलिए इसे लेकर भारत में काफी अलग-अलग विचार हैं। हालांकि, भारतीय समाज में नामों का विचार वर्षों से बदलता रहा है। पहले तो लोग अपने नामों को बदलने से काफी रूबरू थे। लेकिन अब इससे उन्हें कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती है।

परम्परागत नामों का बचाव

परम्परागत नामों को बचाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हमें अपनी परिवार की इतिहास अच्छे से जानने की जरूरत होती है। जब हमको अपने पुरखों के बारे में थोड़ी से जानकारी होती है तो हम अपने परिवार का इतिहास अधिक जान पाते हैं। बहुत से लोगों को अपने पुरखों के नामों के बारे में जानकारी नहीं होती है। ऐसे में लोग नए नाम बनाने के लिए मजबूर होते हैं। इसलिए हमें अपने परिवार को जानना बहुत जरूरी है।

नाम के प्रकार

नाम आमतौर पर तीन प्रकार के होते हैं। पहला नाम 'गोत्र नाम' होते हैं जो पुरखों के अनुसार दिया जाता है। दूसरा नाम 'ब्रह्मनाम' होते हैं जो व्यक्ति को दिया जाता है। तीसरा नाम 'किंनौरी नाम' होते हैं जो महिलाओं को दिया जाता है।

नाम बदलने के कारण

नाम बदलने के कारण तो बहुत होते हैं। कभी कभी शादी के बाद वैसे भी नाम बदल जाता है। कुछ लोग नए धर्म अथवा जाति के लिए भी नाम बदल लेते हैं। वहीं कुछ लोग नाम धन, स्थान अथवा कुछ और कारणों से बदलना पसंद करते हैं।

नाम पर असर

नाम अक्सर किसी व्यक्ति पर असर डालता है। जिस नाम से व्यक्ति जुड़े होते हैं उससे उनके चारित्र अथवा व्यवहार पर असर पड़ता है। इसलिए नाम चुनते समय हमें अपने चारित्र और व्यवहार के अनुसार नाम चुनना चाहिए। हम पुराने नामों से भी इसी असर को चलाते हैं। हमारे पुरखों के नाम हमारी पहचान का अहम अंग होते हैं।
  • नाम आमतौर पर दो भागों में होता है, पहला भाग परिवार का नाम होता है और दूसरा भाग व्यक्ति को दिया जाता है।
  • भारत में नाम का अहम अंग होता है।
  • नाम अक्सर किसी व्यक्ति के चरित्र अथवा व्यवहार पर असर पड़ता है।

कैसे अपने पुराने नाम को खोजें

अपने पुराने नाम को खोजना बहुत जरूरी है। इस तरह हम अपने पुरखों से जुड़े नामों का जान सकते हैं।

परिवार से जानकारी का आवास

सबसे पहले हमें अपने परिवार से जानकारी का आवास होता है। हमें अपने पूर्वजों के नामों के बारे में पता होना चाहिए। धीरे-धीरे हम अपने पुरखों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सकती है।

संग्रहालयों या पुस्तकालयों से जानकारी

आजकल इंटरनेट की वजह से संग्रहालयों या पुस्तकालयों में जानकारी मिलना आसान हो गया है। ज्यादातर संग्रहालयों या पुस्तकालयों में अपने नाम को लेकर जानकारी उपलब्ध होती है। इसलिए हमें संग्रहालयों या पुस्तकालयों से भी जानकारी मिल सकती है।

प्रारंभिक नैंटिंग

अधिकतर नैंटिंग कंपनियों के पास अनुमति होती है अपनी डेटाबेस में पुराने नामों की जानकारी डालने की। इस तरह ये कंपनियाँ लोगों को नाम के पुराने रूपों के बारे में जानने में मदद करती हैं।

अपने नाम को बदलने से पहले ध्यान देने वाली बातें

जब हम नए नाम चुनते हैं, तो हमे अपने नाम के बहुत सारे आसपास के मामलों को भी ध्यान में रखना चाहिए