भारतीय परिवारों की भोजपुरी गाथा।

नस्ल परिचय
भारतीय परिवारों की भोजपुरी गाथा। भारत, एक संस्कृति का विकसित विश्वासघात होने के बावजूद भी एक प्राचीन देश है जो उत्तर से दक्षिण तक अनेक जातियों, भाषाओं और प्रथाओं का गूढ़ विरासत है। भोजपुरी भारतीय भाषाओं में से अहम एवं विस्तृत भाषा है। भोजपुरी क्षेत्र के कुछ पर्वत श्रृंखलाएं वर्षाऋतु के साथ समृद्ध एवं उर्जावान है। भोजपुरी जनजाति जो उत्तर मध्य भारत, बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश में पूरे उत्तर मध्य भारत के कुछ भागों में पायी जाती है । भोजपुरी गाथा किसी बड़े वर्ग या जाति की कहानियों से भरपूर होती है। भोजपुरी गाथाओं की शुरुआत काफी पुराने समय से होती आई हे। भोजपुरी जनजाति के लोगों का अपना बहुत समृद्ध इतिहास है। भारत में परंपरागत धर्म, बोली, संस्कृति और वैश्विकता उपलब्ध है। और वे सभी भोजपुरी वंश वालों के जीवन का एक अभिनय करते हैं। भोजपुरी जाति के मुख्य वंश हैं : यादव, प्रसाद, सिंह, यादुवंशी एवं साक्षी सिंह। इन सभी वंशों के अंदर भोजपुरी गाथाएं भी देखी जा सकती हैं। इन गाथाओं में हर बार एक समस्या होती है, एक संघर्ष होता है जिसका समाधान सामान्य बौद्धिक कोष्ट से नहीं मिलता है। ये गाथाएं वर्ण व्यवस्था को छोड़कर समानता के वेदना की धार्मिकता व जीवन दर्शन को प्रतिनिधित्त्व करती हैं। इसलिए, ये गाथाएं अपनी विशिष्टताओं के कारण दूरस्थ समुदायों की भावनाओं का अधिक विकास करती हैं। साक्षी सिंहः साक्षी सिंह वंश उत्तर प्रदेश एवं बिहार के मध्य भाग में स्थित है। साक्षी सिंह नाम छत्तीसगढ़ से मिला है। संस्कृत शब्द साक्षी भी पूर्ता रूप से अर्थपूर्ण होता है। साक्ष से संबंधित सभी शब्द एवं साक्षी की अपार संज्ञाअर्थकता व जीवन दायरे पर अनुसंधान से यह सिद्ध हुआ है कि वह शक्ति से मिलकर सभी तरह के प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेता है और जीत भी आसानी से हो जाती है। साक्षी सिंह वंश प्रख्यात राजा और नेताओं से उत्पन्न हुआ है। यादव: यादव वंश भारत देश के उत्तर भाग व संधि से स्थानित होता है। इसे एक बहुत ही बड़ा वंश माना जाता है और इस वंश के लोग 'यादुवंशी' भी कहलाते हैं। भोजपुरी जाति में भी यादवों का विशेष महत्व है, क्योंकि भोजपुरी जाति में भी बहुत सारे यादव वंश के लोग होते हैं जो अपनी विरासत को बहुत महत्व देते हैं। भोजपुरी में भी अधिकतर गाथाओं में यादव वंश के लोगों के बारे में कहा जाता है। ये गाथाएं फौजी व नेतृत्व के मामले में भी विशिष्टता के कारण पुरे हिंदुस्तान में मस्ती के नृत्यों समेत सुनाई जाती हैं। प्रसाद: जैसा कि नाम से ही पता चलता है, भोजपुरी जाति में प्रसाद वंश के लोगों को ‘सुखद संपति' का बखान दिया जाता है। भारत के उत्तर-पूर्व में जहाँ पर्वतीय इलाके होते हैं, वहाँ सीधे दृष्टी से इंटरकल क्षेत्र से आते हुए प्रसाद नाम का वंश देखने को मिलता है। सिंह: 'सिंह' नाम अन्य एक बड़े वंश की पहचान है, जो हमारी देश की नजर में नहीं है बल्कि पश्चिम देशों को विलय करते हैं। हालांकि, आप भारत में रखते समय भोजपुरी जाति के साथ बुलावा लगाते हुए 'सिंह' नाम प्रचलित है। भोजपुरी जाति में सिंह वंश के लोग सभी तरह के सामाजिक एवं आर्थिक स्तरों में पाए जाते हैं। यादुवंशी: यादुवंशी भी भोजपुरी जाति में बड़े वंश हैं जो उत्तर प्रदेश, बिहार एवं झारखंड के पश्चिमी और संधि स्थित हैं। यादुवंशी वंश के लोग सीधे भोजपुरी जाति से संबंधित होते हैं। यह वंश प्रसिद्ध कथाओं का घर है। इस वंश की दो सुसरों ने मिलकर महाभारत के महत्वपूर्ण इतिहास को कैद करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था। एक देश की गाथाएं उस देश की विरासत होती हैं। भारतीय गाथाएं उत्तर-पूर्व भारतीय भाषाओं में से एक हैं, जिनमें बहुत सारी जातियों वंशों की गाथाएं समाविष्ट होती हैं। ये गाथाएं जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं जैसे वल्लु संस्कृति, कीर्ति एवं सामाजिक समानता व कर्तव्य। भोजपुरी जाति के इन वंशों के लोगों की गाथाएं क्या आपको प्रभावित करती हैं? कमेंट बॉक्स में अपने विचार दें।
  • १. साक्षी सिंह
  • २. यादव
  • ३. प्रसाद
  • ४. सिंह
  • ५. यादुवंशी