जाति और राजनीति - एक अतिरंजीत संबंध।

नस्ल परिचय

जाति और राजनीति - एक अतिरंजीत संबंध।

जाति और राजनीति दो ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन्हें हमेशा से विस्तार से विचार करने की आवश्यकता रही है। दोनों के बीच एक संबंध होता है जो शायद हम इतनी अच्छी तरह समझ पा नहीं पाते हैं। इस लेख में, हम जाति और राजनीति के बारे में एक से बढ़कर एक मुद्दे पैदा करेंगे और संबंध को समझने की कोशिश करेंगे।

जाति क्या होती है?

जाति एक सामाजिक वर्ग होती है जो परंपरागत रूप से उत्पन्न होती है। यह लोगों की वर्ण, जात, मजहब या काम के आधार पर तय की जाती है। जाति धर्म या नस्ल के आधार पर धार्मिक अथवा सामाजिक आधार पर भी तय की जा सकती है। एक समाज में जाति की संख्या आमतौर पर ढेर होती है। इसे भारतीय समाज में बहुत गौर से देखा जाता है।

जाति एक ऐसा मुद्दा है जिसको लेकर कई संघर्ष हुए हैं। कुछ लोग जाति को एक विभाजक मानते हैं जो समाज को अलग-अलग तबकों में विभाजित करता है। कुछ लोगों को इससे भी अधिक नुकसान उठाना पड़ता है जो जाति नामक दुर्गति का शिकार होते हैं। इसलिए, जाति को लेकर संवेदनशीलता रखना बहुत आवश्यक है।

राजनीति क्या होती है?

राजनीति बहुत अधिक आकार वाला शब्द है। इसका अर्थ होता है सत्ता के हिसाब से कार्य करना। राजनीति के जरिए समाज व देश को तरक्की की ओर ले जाने का काम किया जाता है। राजनीति लोगों के बीच संबंध बनाने, संघर्षों को हल करने और समझौतों को करने का तरीका है।

जैसा कि हम जानते हैं, राजनीति बहुत संवेदनशील विषय है। इस विषय को लेकर उत्पन्न संघर्ष समस्याओं के बीच तरलता बनाए रखना मुश्किल होता है। इसलिए राजनीति को समझने के लिए इसके अनेक संघर्षों को भी समझना आवश्यक होता है।

जाति और राजनीति के बीच उलझन

जाति और राजनीति के बीच उलझन हमेशा से रही है। कुछ लोग जाति और उसकी वैशिष्ट्यों को राजनीति का एक साधन मानते हैं। जबकि, अन्य लोग जाति और उसके प्रति अनुचित व्यवहार को राजनीति में शामिल करने का विरोध करते हैं।

आमतौर पर जाति के भेद विभाजन के रूप में राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। जाति विवादों से जुड़े कई उदाहरण होते हैं, जिनमें ये विवाद के विवेकाधीन होते हैं। इसलिए, जाति संबंधी संघर्षों को राजनीतिक रूप से बहुत ध्यान से देखना आवश्यक होता है।

जाति की महत्वता

जाति एक महत्वपूर्ण विषय है जिसे अलग अलग ध्रुव में देखा जाता है। कुछ लोग जाति को समाज का स्वाभिमान मानते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें समाज का विभाजक और हिंसादि टूल मानते हैं। जाति के संकट को देखते हुए, सरकार ने विभिन्न कानूनों के माध्यम से जाति विवादों को हल करने की कोशिश की है।

जाति का आंतरिक तंत्र होता है जो दूनीय होता है। इसलिए, जाति समाज को आठाकर्षण से खींच लेती है। जाति की भावनाओं, सम्प्रदायों और प्रतिक्रियाओं को समझने के लिए जरूरी होता है कि हम जाति के मूल और इतिहास को समझें।

राजनीति की महत्ता

राजनीति एक ऐसा एक्सटेंशन है जिसे अच्छी तरह समझाना मुश्किल होता है। राजनीति का मतलब होता है कि किसी देश या संघ को संचालित करने के तरीके का विकल्प बनाना। राजनीति काफी बड़ी होती है और इसमें अपने विचारों और स्थानों को लेकर संघर्षों की एक सैकड़ों का व्यवस्थित कार्य होता है।

यहाँ तक ​​कि जो लोग राजनीति से दूर रहते हैं, उन्हें इसे समझना चाहिए। यदि कोई समाज राजनीति से दूर रहता है तो वह इसकी नकारात्मक प्रभावों का शिकार हो सकता है जो उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं।

जाति और राजनीति के बीच संबंध

जाति और राजनीति एक-दूसरे से गहरा जुड़े हुए हैं। जबकि जाति एक सामाजिक वर्ग होती है जो समाज के नीचे उत्पन्न होती है, वहीं राजनीति उसी समाज को संचालित करने के लिए एक साधन होती है।

जाति विवाद एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा होता है जिसे देखते हुए सरकारों को फैसले लेने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जाति संबंधी समस्याओं को हल करने के लिए सरकार ने अनेक अधिकारिक विभाग एवं समितियां बनाई हैं।

इन सभी जाति संबंधी मसलों से दूर होने के लिए, घटनेवले बुरे प्रभावों से बचने के लिए एक दूसरे के विचारों का सम्मान करना एक बुनियादी सिद्धांत होता है। हमें राजनीति के सम्पूर्ण मूल में समाज व जाति के बारे में समझने की आवश्यकता होती है।

संबंधों को सुधारने की जड़

जाति और राजनीति के बीच संबंध को सुधारने में समय लगता है। दोनों ही मुद्दों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। जाति संबंधी मुद्दों को संवेदनशीलता और गुंजाइश के साथ सुलझाया जा सकता है। राजनीति से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए अधिक संवेदनशील रूप से चर्चा की जानी चाहिए।

दोनों ही मुद्दों के संबंध में समझौता करना बेहतर होगा। समाज क