क्या वर्गवाद लोकतंत्र के सुधार को रोकता है?

नस्ल परिचय

क्या है वर्गवाद?

वर्गवाद एक स्थायी समाजिक दुर्भावना है जो समाज की असमानता के कारण होती है। इसके कारण लोगों को दरिद्रता, असुरक्षा और असमानता का अनुभव होता है। वर्गवाद सामाजिक वैश्यवृत्ति पर आधारित होता है जिसमें एक वर्ग समृद्ध वर्ग के सामने होता है। इससे वे लोग जो समाज के असमानता के शिकार होते हैं, उन्हें समानता का अनुभव नहीं होता है।

वर्गवाद के प्रकार

वर्गवाद कई प्रकार के होते हैं जिनमें शामिल हैं जातीवाद, आर्थिक वर्गवाद, जाति-धर्म वर्गवाद और बौद्धिक वर्गवाद। जातीवाद में व्यक्ति की जाति उसकी स्थानीय स्थिति की तुलना में उच्चतरता या निम्नता में उसकी समाज में स्थिति की तुलना में उच्चतरता और निम्नता का पता चलता है।

आर्थिक वर्गवाद में व्यक्ति के पास धन के विभिन्न स्तर होते हैं और उनकी समाज में स्थिति धन के स्तर से निर्धारित होती है। जाति-धर्म वर्गवाद में व्यक्ति की जाति या धर्म उसकी समाज में स्थिति की तुलना में उच्चतरता या निम्नता का पता चलता है।

बौद्धिक वर्गवाद में व्यक्ति को उसके विद्यार्थी हुए वर्षों की तुलना में उसकी बौद्धिक क्षमता, ज्ञान और शिक्षा के आधार पर उच्चता या निम्नता का स्तर मापा जाता है।

लोकतंत्र क्या है?

लोकतंत्र एक ऐसी व्यवस्था है जो व्यक्तियों को स्वाधीनता और समानता का अनुभव दिलाती है। इसके अंतर्गत निर्णय लेने की शक्ति जनता के पास होती है। इससे सरकारों को स्वतंत्र रूप से सत्ता की व्यवस्था करनी होती है। लोकतंत्र में जनता को निर्णय लेने की शक्ति दी जाती है जो उन्हें सरकार के प्रति अधिकतर उच्चतम स्तर पर जिम्मेदार बनाता है।

लोकतंत्र के फायदे

  • संविधान में न्याय और शांति के मूल्यों पर आधारित होता है
  • नागरिकों की आवश्यकताओं और इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए नीतियों और कानूनों की निर्माण होती है
  • जनता को सशक्तिकरण देता है
  • नेताओं को अपने काम के लिए जिम्मेदार बनाता है

लोकतंत्र और वर्गवाद के संबंध

लोकतंत्र और वर्गवाद दोनों ही समाज की मुख्य दुर्भावनाएं होती हैं। लोकतंत्र में समानता का जीवनशैली होता है जो वर्गवाद के खिलाफ होता है। जब एक समतावादी लोकतंत्र स्थापित होता है तो समाज में असमानता से निपटने की क्षमता मौजूद होती है।

समानता की यह व्यवस्था खादी एवं निरपेक्षता भी सुनिश्चित करती है, जिससे वर्गवाद की भावना नहीं आती है। लोकतंत्र के अंतर्गत लोग गलत बर्ताव करने वाली सरकारों को व्यवस्था से हटाने का अधिकार रखते हैं।

वर्गवाद लोकतंत्र के सुधार को रोकता है क्योंकि यह लोगों की स्थिति में असमानता लाता है, जिससे वे समान अवसरों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। आर्थिक और जाति-धर्म वर्गवाद इस तरह की असमानता का कारण बनते हैं। इससे देश में असमानता भड़कती है जो संघर्ष और यहां तक ​​कि घातकता को बढ़ाती है।

लोकतंत्र वर्गवाद के खिलाफ होता है, जबकि वर्गवाद लोकतंत्र के उत्पादन का कारण बनता है। समृद्ध और गरीब वर्ग के बीच के अन्तर को कम करने के लिए लोकतंत्र के अंतर्गत कुछ नीतियों का अमल करना होता है जैसे कि आर्थिक समानता योजनाएं, समानता के अवसरों का प्रचार आदि।

संगठित वर्ग लोकतंत्र में वर्गवाद के खिलाफ कैसे लड़ता है?

जब एक संगठित वर्ग सामान्य लोगों के हितों को ध्यान में रखता हुआ वर्गवाद के खिलाफ लड़ता है तब उसमें एक परिवर्तन का अंश होता है। उस समय, वर्गवाद से लड़ने की स्थिति बनती है जो न केवल सामान्य जनता को बल्कि वर्गवाद के ऎलाकों में भी सकारात्मक परिवर्तन लाती है।

समुदाय के कुछ सदस्यों के लिए लूट और व्यवहार की पुरानी परंपराओं का उल्लंघन करना एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत होती है। इसके लिए समुदाय विकास के लिए काम करता है और अपने लोगों को सम्मिलित करने के उपाय खोजता है।

तत्समक वर्गवाद लोकतंत्र के विपरीत क्यों होता है?

तत्समक वर्गवाद लोकतंत्र के विपरीत होता है, जो संभवतः सैकड़ों वर्षों से चल रहा है। इसलिए, जिन देशों में ऐसा होता है, वे विकास के लिए बाधाओं का सामना करने के लिए मुश्किल होते हैं। विशेष रूप से वे देश जहां कमजोर वर्ग समूहों की आवाज बलवान वर्ग से ज्यादा प्रभावशाली होती है।

तत्समक वर्गवाद के शीर्ष लाभदायकों को रखने के लिए, लोगों को उनसे समृद्धि के नाम पर कम काम और कम वेतन पर रखा जाता है। इससे उन्हें समान अवसरों का नहीं मिलता जो समाज में असमानता बढ़ाता है।

संदर्भ