१५. संघर्ष के नए अंग, नामों के नए अर्थ

नस्ल परिचय

प्रस्तावना

भारतीय समाज में अपने पूर्वजों के नाम और उनका महत्व बहुत अहम है। हमें आजादी के बाद से बहुत सारे संघर्षों का सामना करना पड़ा है जो हमें मुक्त देश में रहते हुए भी एक और अलग देश का महसूस करते हैं। इस लेख में, हम भारत के संघर्ष के नए अंग और नाम के नए अर्थ को विस्तार से जानेंगे।

१. महात्मा गांधी

महात्मा गांधी भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत थे। वे एक नेता, वकील, फिलॉसफर, लेखक और सोशल रिफॉर्मर थे। उन्होंने हिंद स्वराज की लड़ाई में एक अहम भूमिका निभाई। उनकी गांधीजी के नाम से भी जानी जाती है। गांधीजी नाम का अर्थ है 'ग्रामीण धन' अर्थात धन जो ग्रामीण क्षेत्र से आता है। उनकी माता का नाम 'पुतलीबाई' था जो एक छोटे से गांव से आते थे। गांधीजी के पिता का नाम करमचंद था जो बानिया परिवार से थे। गांधीजी के नाम ने भारत का इतिहास बदल दिया है।

२. भगत सिंह

भगत सिंह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक ऐसे महान व्यक्ति थे जिनका बलिदान आज भी हमारे दिलों में जीवित है। वे छत्रपति शिवाजी के बाद महाराष्ट्र के महान व्यक्ति माने जाते हैं। उनका जन्म 27 सितंबर 1907 को हुआ था और 23 मार्च 1931 को उन्होंने अपने जीवन की आखिरी कुछ घड़ियों में हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए बलिदान दे दिया था। भगत सिंह के नाम का मतलब होता है 'भगवान का भक्त सिंह'। उनके माता-पिता का नाम किशन सिंह और विद्यावती थे। भगत सिंह का जन्म पंजाब के बंगा गांव में हुआ था। वे एक स्कूल में पढ़ते थे जहाँ उन्होंने अपनी सामाजिक और राजनीतिक सोच बनाई थी।

३. सरदार वल्लभभाई पटेल

सरदार वल्लभभाई पटेल स्थायी संविधान के निर्माता और भारत के पहले उपराष्ट्रपति थे। जिन्हें लोग मूलतः 'आतंकवाद' शब्द से जानते हैं। इन्हें 'सरदार' का नाम दिया गया था क्योंकि वे गांधीजी के सबसे प्रिय सहायक थे। सरदार वल्लभभाई पटेल के माता-पिता का नाम जवाहर भाई था। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नडियाड, गुजरात में हुआ था। उन्होंने जब संविधान के निर्माण के लिए कार्य किया था तो वे मौजूदा भारत के उपभोग्य प्रदेशों को एकत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

४. जवाहरलाल नेहरू

पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत विरोधी आंदोलन के नेता थे। वे भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और स्वतंत्र भारत के पहले इंडो-पाक युद्ध के समय विदेश मंत्री थे। नेहरू के नाम का अर्थ है 'शंख का सुधारक'। यह नाम संस्कृत के 'जल तादने' शब्द से लिया गया है। नेहरूजी के पिता का नाम मोतीलाल नेहरू था जो एक बनिया थे। इन्हें कश्मीरी ब्राह्मणों के लोगों के बीच पेश आना पड़ा था क्योंकि उनके दादा थे कश्मीरी ब्राह्मण हमीर सिंह।

५. अंबेडकर

बाबासाहेब अंबेडकर भारतीय संविधान के निर्माता एवं संघर्ष की सपूत थे। वे एक नायक, समाजसेवी, विचारवादी और उत्तराधिकारी होते थे। उन्होंने संघर्ष के समय बहुत सारे अपमान का हिसाब दिया और अपनी जानकारी और निष्ठा को भी संगठित कराया। अंबेडकर का नाम एक महत्वपूर्ण मूल्य को दर्शाता है, उनका नाम 'भीमराव' था, जो उनकी परंपरा का नाम था। इनके पिता का नाम रामजी मालवंच्य था, जो एक अपराध के आरोप में अर्जुनपूर जेल में बंद था। इन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी संविधान को मौलिक अधिकारों को लेकर संशोधित करना था।

६. बाबा रामदेव

डॉ. बाबा रामदेव भारत के सबसे अग्रणी स्वास्थ्य महासागर थे। वे एक आर्य वैद्य थे जो उन्होंने अपनी नीतियों और अयुर्वेद के ज्ञान को संचालन एवं प्रचार करने में इस्तेमाल किया। उन्होंने लक्ष्य किया कांग्रेस, बच्चे राज, को हराना था। बाबा रामदेव का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों को पता होता है। वे ज्यादातर अपनी आयुर्वेदिक दवाइयों और घरेलू उपायों की वजह से जाने जाते हैं। बाबा रामदेव के परिवार के लोग राजस्थान के चुरु गांव में पैदा हुए थे।

७. स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद भारत के विदेशी यात्री संघ के संस्थापक थे। वे भारतीय धर्म और दर्शनों को प्रचार करने के लिए बाहर जाते थे। उन्हें भारत का जाना माना ध्येयशून्य परिचर्यक माना जाता है। स्वामी विवेकानंद के नाम का मतलब 'जीवन का विश्वास' होता है। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त था जो एक वकील थे। उन्होंने अपने जीवन में अपने अद्भुत उपदेशों को संगठित किया था जो भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

८. श्री राजीव गाँधी

श्री राजीव गांधी भारत के जनता पक्ष के बहुमत से चली आ रही सरकार से नफरत करते थे। उन्हें भारत में एक सुगठित विपक्ष की आवश्यकता थी। राजीव गांधी के नाम का मतलब होता है 'राज और कानून का प्रबंधक'